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सरकारी उपेक्षा से नरक बनी ताजनगरी

94 Days ago

स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने की दौड़ में पिछड़ने के बाद ताज नगरी अब स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान में भी खिसक कर 47वें से 73वें पायदान पर पहुंच गई है। यह शहर पहले इस मामले में 27वें स्थान पर था। हालांकि प्रधानमंत्री का स्वच्छ भारत अभियान आगरा में भी चल रहा है, लेकिन वह भी शहर के चेहरे बदलने और मूलभूत सुविधाएं बनाए रखने में असरदार साबित नहीं हो रहा है।

यह देख सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण कुमार ने आईएएनएस से कहा,"यह हाल तब है, जब यह शहर देश का नम्बर एक पर्यटन केंद्र है, जहां एक करोड़ लोग हर साल आते हैं।"

बहरहाल, आगरा नगर निगम इस गड़बड़ी को दूर करने के लिए नई योजना पर कार्य कर रही है और रात में शहर के बाजारों की सफाई करने पर विचार कर रही है। नगर निगम आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि पहले एक दर्जन बाजारों की हर शनिवार की रात सफाई की जाएगी और बाद में शहर के अन्य क्षेत्रों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि निगम के वार्डो के सफाई निरीक्षकों को कैमरे भी दिए जाएंगे, ताकि वे सफाई कार्य की तस्वीरें भी खींच सकें।

शहर की गंदगी को लेकर दूसरे सामाजिक कार्यकर्ता रंजन शर्मा ने आईएएनएस से कहा कि शहर के गंदा होने के पीछे मुख्य कारण सरकार की गलत प्राथमिकता है। अधिकारीगण निश्चित मूल काम करने की जगह अपना अधिकांश समय मेले और महोत्सवों के आयोजन पर देते हैं। इस महीने में भी शहर में ताज महोत्सव से लेकर कार रेस तक आयोजित होता है, लेकिन शहर की सफाई, यातायात दुरुस्त करना और कानून-व्यवस्था सुधारना उनकी प्राथमिकता सूची में कहीं नहीं हैं।

खास बात है कि स्थानीय नेताओं की शहर या यमुना की सफाई में कोई भूमिका नहीं है। कागज पर सार्वजनिक शौचालय बने हुए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि शहर के अधिकांश भागों में लोग खुले में नालों के किनारे शौच करते हैं।

एक पर्यटक जगन गुप्ता ने आईएएनएस से कहा कि ज्यों ही आप शहर में प्रवेश करेंगे, विचित्र तरह की दरुगध से आपका सामना होगा और वह शहर छोड़ने तक साथ नहीं छोड़ेगा।

मोदी सरकार हालांकि यह दावा करती हैं कि उनकी सरकार ने 80 लाख शौचालय देश भर में बनवाए हैं, लेकिन यह भी सच है कि 59.5 करोड़ लोग भारत में अब भी खुले में शौच करते हैं। आगरा की स्थिति यह है कि जब कोई विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने आता है तो वह पहला सवाल यही पूछता है कि पूरे इलाके से दरुगध क्यों आ रही है?

एक विदेशी पर्यटक ने यहां तक कहा, "पूरे शहर में विचित्र तरह की बदबू फैली हुई है। कारण क्या हैं हमलोग नहीं जानते हैं, लेकिन लगता है मानों पूरा शहर मैले के ढेर पर बसा है।"

एक हस्तशिल्प निर्यातक अभिनव जैन ने आईएएनएस से कहा कि शहर की नालियां जाम हो चुकी हैं। ट्रीटमेंट प्लांट्स भी काम नहीं कर रहे हैं। शहर के कई इलाकों में नाले के पानी बोरिंग कर जमीन के अंदर पहुंचाए जाते हैं।

ताजमहल के आसपास ताजगंज इलाका है, उसका तो और भी बुरा हाल है। वहां सैकड़ों की संख्या में तांगे दिखाई पड़ते हैं, जिन्हें घोड़े और ऊंट खिंचते हैं। इनके मल सड़क पर जहां तहां पड़े रहते हैं।

जैन ने कहा कि सड़क पर जानवरों के पड़े मल जूते में लग कर पर्यटकों के साथ ताजमहल तक पहुंच जाते हैं। इस क्षेत्र की डेयरियां भी अब तक नहीं हटाई गईं। नतीजा है कि ताजमहल के पूर्वी द्वार के पास सड़कों पर पशुओं की लड़ाई अकसर देखी जाती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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