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विकास के काम बीच कानून व्यवस्था चुनौती (अखिलेश सरकार के 4 साल)

199 Days ago

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार 15 मार्च को चार वर्ष पूरे करने जा रही है। इन चार वर्षो में अखिलेश ने कई ऐसी योजनाएं चलाईं, जिनका फायदा समाजवादी पार्टी को अगले साल चुनाव में मिल सकती है, वहीं कानून व्यवस्था की बिगड़ती हालत अखिलेश सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है।

अखिलेश यादव ने 15 मार्च 2012 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद से अब तक चार वर्षो के दौरान उन्होंने कई योजनाएं चलाईं। इन चार वर्षो के भीतर उन्होंने अपनी इमेज बदलने की पूरी कोशिश की।

सरकार की तरफ से गरीबों के लिए समाजवादी पेंशन योजना और राम मनोहर लोहिया आवास योजना चलाई गई, तो युवाओं को ध्यान में रखकर लैपटॉप वितरण योजना, बेरोजगारी भत्ता जैसी योजनाएं चलाई गईं। इसके अलावा किसानों को ध्यान में कामधेनु योजना चलाई गई, जिसका खासा असर भी दिखाई दिया।

इनके अलावा मुख्यमंत्री ने ऊर्जा के क्षेत्र में भी काफी काम किया। सौर ऊर्जा को लेकर काफी काम इन चार वर्षो के भीतर मुख्यमंत्री ने कराए। आज सौर ऊर्जा को हर जिले तक पहुंचाने का प्रयास हो रहा है।

अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में जिन योजनाओं को काफी महत्व दिया, उनमें लखनऊ मेट्रो परियोजना भी शामिल है। मुख्यमंत्री की गंभीरता की वजह से ही मेट्रो के निर्माण में काफी तेजी से काम हो रहा है। पहले चरण में मेट्रो कृष्णा नगर से लेकर चारबाग तक चलेगी। सरकार में काम कर रहे अधिकारी बताते हैं कि मेट्रो को हर हाल में नवंबर तक शुरू कर दिया जाएगा।

शासन के एक बड़े अधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मुख्यमंत्री मेट्रो की शुरुआत को लेकर काफी गंभीर हैं। इसको हर हाल में नवंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। नवंबर में मेट्रो शुरू होने के बाद यह अखिलेश सरकार की उपलब्धियों में शामिल हो जाएगी।"

उन्होंने बताया कि मेट्रो के अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर भी काफी तेजी से काम हो रहा है। यह योजना भी अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। इसका काम भी दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता डॉ. सी.पी. राय ने आईएएनएस से कहा कि अखिलेश सरकार ने बीते चार वर्षो के दौरान काफी काम किया है।

राय ने कहा, "अखिलेश ने पिछले चार वर्षो के दौरान उप्र को तरक्की का रास्ता दिखाया है। अखिलेश ने इन चार वर्षो में विकास की जो एक लकीर खींची है, उससे आने वाले दिनों में राज्य की दशा और दिशा बदलेगी।"

उत्तर प्रदेश में हालांकि कानून व्यवस्था को लेकर पिछले चार वर्षो में हमेशा ही अखिलेश सरकार पर सवाल खड़े हुए हैं। हर बार अखिलेश ने यही दावा किया कि उप्र में कानून व्यवस्था अन्य राज्यों से बेहतर है। राज्य में हत्या, लूट, अपराध और दुष्कर्म की घटनाओं पर पुलिस अंकुश लगाने में नाकाम रही है।

एक तरफ जहां सरकार के आला अधिकारी मुख्यमंत्री की परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार के बीते चार वर्ष निराशा से भरे रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कानून व्यवस्था के नाम पर पुलिस की इकबाल बहाली की बात करने वालों ने पुलिस के इकबाल को ध्वस्त किया।

पाठक ने कहा, "भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती सरकार ने किसानों को कर्ज माफी के नाम पर धोखा दिया। वादों से पीछे हटने की राजनीति को अक्षम अपराध मानने की बात करने वाले जानबूझ कर अक्षम अपराध करते रहे, अब नए इरादों के नाम पर नए वादों का मुलम्मा चढ़ा बरगलाने की कोशिश करने में जुटे हैं।"

इधर, कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आईएएनएस से कहा कि अखिलेश के चार वर्ष जनता के लिए अच्छे साबित नहीं हुए। आए दिन हत्या, लूट और अपहरण की घटनाएं हो रही हैं। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर तो सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है। गांव, गरीब और किसान की उपेक्षा की गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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